वैश्िवक शेयर बाजारों में भारी उथल पुथल को देखते हुए सोने जैसे अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित माने जाने वाले निवेश में निवेशकों का भरोसा एक बार फिर बढ़ा है।
जहां एक ओर वैश्िवक रूप से शेयर बाजारों की हालत पतली हुई है वहीं सोना नित नयी ऊंचाइयां छू रहा है। गत शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव 770 डालर प्रति ट्राय औंस को छू गए जो जनवरी 1980 के बाद का सर्वोच्च स्तर है।
दूसरी ओर तीन महीने पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में सोना जहां आठ हजार रूपए प्रति 10 ग्राम हुआ करता था वहीं यह गत शुक्रवार को एक समय 10 हजार रूपए प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया जो इस साल का सर्वोच्च स्तर है। इस प्रकार पिछले तीन महीने में सोने के दाम लगभग 25 प्रतिशत तक चढ़ गए हैं।
वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के उपनिदेशक केयुर शाह ने एक बातचीत में कहा कि सोने को पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। खासकर संकट के दिनों में इसकी महत्ता बढ़ जाती है।
श्री शाह का कहना है कि वैिश्वक शेयर बाजारों में भारी अनिश्िचतता के बरक्स अन्य विदेशी मुद्राओं के मुकाबले डालर के लगातार गिरने तथा कच्चे तेल के दाम 90 डालर प्रति बैरल के पार चले जाने से सोने की कीमतों में पिछले कुछ महीनों से जिसे तरह से आग लगी है उससे निवेशकों का एक बार फिर से इसकी ओर आकर्षित होना लाजिमी है।
डद्योग एवं वाणिज्य संगठनण्ऐसोचैम की हाल में जारी एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल में देश में सोने में निवेश पर रिटर्न यानी प्रतिफल करीब 34 फीसदी बढ़ा है। पिछले 30 दिनों में ही सोने में निवेश पर रिटर्न 14 प्रतिशत बढ़ा है।
विश्लेषकों का कहना है कि वैश्िवक रूप से वित्तीय बाजारों की हालत पतली होने के कारण निवेशक शेयर बाजारों से पैसा निकाल कर सोने में लगा रहे हैं। डालर के कमजोर होने से अन्य विदेशी मुद्राओं में सोने का निवेश सस्ता पड़ता है। यही कारण है कि सोने की लिवाली लगातार बढ रही है और इसके दाम आसमान छू रहे हैं।
श्री शाह का कहना है कि सोने में आयी वैश्िवक तेजी प्राकृतिक है क्योंकि इसकी मांग दिनों दिन बढ़ रही है जबकि आपूर्ति स्थिर है। विश्व में इस समय करीब 400 खानों से सोना निकाला जा रहा है। जहां इसकी वैश्िवक मांग करीब 5000 टन है वहीं पिछले पांच सालों से इसका उत्पादन औसतन 2550 टन के आसपास टिका है। सोने की मांग और आपूर्ति में इतने बड़े अंतराल से इसकी कीमतें आगे और ऊपर जाने की उम्मीद है।
दूसरी ओर एसोचैम के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2005..06 के दौरान भारत में सोने का उत्पादन जहां लगभग 3.53 टन था वहीं कारोबारी साल 2006.07 के दौरान यह घटकर 3.05 टन रह गया।
यही कारण है कि भारत अपनी सोने संबंधी मांग को बड़े पैमाने पर आयात से पूरा करता है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2006.07 में जहां भारत ने करीब 750 टन सोने का आयात किया वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान यह बढ़कर 1000 टन हो जाने की उम्मीद है।
धातु एवं जिंसों के वायदा कारोबार एक्सचेंजण्एनसीडीएक्स के क्षेत्रीय प्रमुख आर रघुनाथन का कहना है कि एक्सचेंजों के माध्यम से सोने चांदी का आनलाइन कारोबार शुरू हो जाने से निवशकों के लिये इसमें निवेश और अधिक सहज हो गया है।
श्री रघुनाथन का कहना है कि डी मैट खाते से सोने चांदी का वायदा कारोबार शुरू होने से इसे भौतिक रूप से खरीद कर अपने पास रखने की जरूरत नहीं है। इससे जोखिम खत्म हो गया है।
विदेशों में सोने में निवेश के लिये कई सालों के लिये अलग फंड बने हैं लेकिन भारत में यह प्रक्रिया अभी नयी नयी है। श्री रघुनाथन ने बताया कि पिछले दिनों यूटीआई ने सोने में निवेश के लिये एक फंड शुरू किया है। हालांकि यह बहुत सफल नहीं हो सका है क्योंकि निवेशकों में इसके प्रति अभी जागरूकता का अभाव है। उम्मीद है कि सोने में बढ़ते रिटर्न को देखते हुए आने वाले दिनों में कई अन्य कंपनियां सोने में निवेश के लिये कोष शुरू करेंगी।
सोने में निवेशकों की बढ़ती रूचि का एक कारण डालर के मुकाबले रूपए की मजबूती भी है। रूपए की मजबूती के कारण सोने का आयात सस्ता पड़ रहा है जिससे इसकी मांग बढ़ रही है। वैसे कारोबारियों का कहना है कि अगर रूपए के मुकाबले डालर अगर पिछले साल के स्तर पर रहता तो सर्राफा बाजार में सोने के दाम इस समय करीब 12000 रूपए प्रति 10 ग्राम होते।
एसोचैम के आकलन के अनुसार भारत में आयात होने वाले सोने में से 70 फीसदी का इस्तेमाल आभूषणों और बाकी 30 प्रतिशत का प्रयोग निवेश के लिये बिस्कुटों और सिक्कों में होता है। सोने में निवेशकों की बढ़ती रूचि को ध्यान में रखते हुए इंडियन बैंक सहित कुछ बैंकों ने हालमार्क युक्त सोने के बिस्कुट और सिक्के बेचने शुरू कर दिये हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों के लिये आभूषणों के बजाए सोने के बिस्कुटों और सिक्कों में निवेश कहीं अधिक सहज होता है क्योंकि गहनों को दोबारा बेचने पर इसके दामों में 25 प्रतिशत तक की कटौती हो जाती है। वहीं बिस्कुटों और सिक्के लगभग बाजार भाव पर ही बिक जाते हैं।
त्योहारी मौसम और शादी ब्याह का मौसम नजदीक आने के कारण देश में सोने की मांग प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में सोने में निवेशकों की रूचि और बढने की उम्मीद है।
सोने ने फिर से जीता निवेशकों का भरोसा
October 23, 2007 by subhashmaurya
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