Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for जून, 2007

bheel-art.jpg

आज एक नए शब्‍द से परि‍चि‍त हुआ। वह शब्‍द है मौताणा। सुनने पर बड़ा अजीब लगा। मेरे एक वरि‍ष्‍ठ सहयोगी ने इस शब्‍द का मतलब समझाया।

दरअसल यह शब्‍द राजस्‍थान में उदयपुर के आसपास अधि‍क प्रचलि‍त है।    इस क्षेत्र में भील आदि‍ जनजाति‍यों में कि‍सी व्‍यक्‍ति‍ की मौत के पीछे अगर कि‍सी भी तरह कोई दूसरा व्‍यक्‍ति‍ अगर जि‍म्‍मेदार हो तो मृतक के रि‍श्‍तेदार उससे हर्जाना मांगते है जि‍से मौताणा कहते हैं।   

 मौताणा वसूलने के वे पुलि‍स या कचहरी का सहारा नहीं लेते। वे मृतक की लाश उसकी मौत के लि‍ये जि‍म्‍मेदार व्‍यक्‍ति‍ के घर के सामने रख देते हैं और उससे मौताणा मांगते हैं। वे यह भी कहते हैं कि‍ मौताणा दो वर्ना तुम्‍हारे घर में लाश का अंति‍म संस्‍कार करेंगे। और कि‍सी भी कीमत पर मौताणा वसूले बगैर लाश नहीं हटायी जाती। 

आज की खबर यह थी कि‍ एक भील व्‍यक्‍ति‍ एक सड़क पर टैक्‍टर से घायल हो गया और अस्‍पताल में उसकी मौत हो गयी। मृतक के रि‍श्‍तेदारों में टैक्‍टर मालि‍क के घर के सामने लाश रख दी और मौताणे की रकम 50000 रूपए वसूलने के बाद ही लाश हटायी गयी।   

मेरे सहयोगी बता रहे थे कि‍ एक बार कि‍सी भील को एक सांप ने काट लि‍या था। तो जि‍स व्‍यक्‍ति‍ के खेत से होकर वह सांप गया था मौताणे की रकम उससे वसूली गयी। एक बार तो हद ही हो गयी। एक व्‍यक्‍ति‍ की मौत हो गयी और कारण यह खोजा गया कि‍ बीस साल पहले फुटबाल खेलते हुए उस व्‍यक्‍ति‍ को चोट लग गयी था। माना गया कि‍ मौत उसी वजह से हुई होगी और लोग मौताणा वसूलने पहुच गए उस व्‍यक्‍ति‍ के घर।     

Advertisements

Read Full Post »

हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य जगत वि‍मल कुमार को भारत भूषण सम्‍मान प्राप्‍त एक कवि‍ के रूप में ज्‍यादा जानता है। लेकि‍न पि‍छले दि‍नों वह एक नये रूप में नजर आए। दो कवि‍ता संग्रहों के बाद अपने उन्‍होंने गद्य लि‍खा है। वि‍मल की नयी कि‍ताब का नाम है चोर पुराण जि‍सका लोकार्पण पि‍छले दि‍नों हि‍न्‍दी के मशहूर आलोचक मैनेजर पांडे ने कि‍या।  

   चोर पुराण एक दि‍लचस्‍प कि‍ताब है। इसे कि‍सी एक श्रेणी में रख पाना कठि‍न है। इसमें लघुकथाएं हैं, व्‍यंग्‍य है और कवि‍ता भी। फि‍र भी इसे व्‍यंग्‍य संग्रह कह सकते हैं।

    यह कि‍ताब एक चोर के नजरि‍ये से अपने आस पास के समाज और वि‍डंबनाओं को परखने की कोशि‍श है।   वि‍मल कुमार का चोर आपको बुरा तो लग सकता है, लेकि‍न आप उससे नफरत नहीं कर सकते। यह चोर अलग अलग न‍जरि‍ये से दुनि‍यां को देखता है। इस क्रम में वह समाज की कई नंगी सचाइयों को उघेड़ देता है। 

     वि‍मल अपनी कि‍ताब में कई बार सीधे हमले में जुड़ जाते हैं। वह कई टुकड़ों में आज क राजनीति‍ज्ञों का नाम लेने लग जाते हैं। उस समय कई बार वो बड़ी वि‍वादस्‍पद और कहीं कहीं गैरजरूरी टि‍प्‍पि‍णि‍यां भी कर जाते हैं, जो नहीं की जाती तो कोई फर्क नहीं पड़ता। 

   पेश है पेंगुइन प्रकाशन से छपी वि‍मल की कि‍ताब चोर पुराण के कुछ दि‍लचस्‍प अंश। उम्‍मीद है आपको ये अंश पसंद आएगें। 

         मंगलाचरण

 चोर ने लि‍खी   एक   कहानी

इक कहानी में, सबकी  कहानी

सबकी कहानी, सबकी कहानी

चोर ने लि‍खी  एक   कहानी

झूठ  का  है  बस  बोलबाला

ताक़त का है सब खेल  सारा

पर सच की रहेगी हर पल नि‍शानी

चोर ने लि‍खी  एक   कहानी

इक कहानी में, सबकी  कहानी 

लाखों डकारे पर चोर न कहलाए

राजा का वो ही मन बहलाए

जो छल करे वो इनाम पाए

जो तारीफ करे वो सम्‍मान पाए

चोर ने लि‍खी  एक   कहानी

इक कहानी में, सबकी  कहानी

भांडा फूटे तो सब मि‍ल जावें

अपने का खूब नैति‍क कहलावें

कोई न देखे हमारी मजबूरी

हमने देखी सबकी कमजोरी

चोर ने लि‍खी  एक   कहानी

इक कहानी में, सबकी  कहानी  

जमा करें जो सोना चांदी

वो ही छीने हमारी आजादी

आएगी एक दि‍न इंकलाब की आंधी

बरसेगा तब खूब पानी 

चोर ने लि‍खी  एक   कहानी

इक कहानी में, सबकी  कहानी 

     चोर और चैनल

 चोर को महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हि‍न्‍दी वि‍श्‍ववि‍द्यालय की एक छात्रा से प्रेम हो गया। वह शादीशुदा थी। चोर भी शादीशुदा था। पता नहीं कैसे टीवी चैनलवालों को यह पता चला गया। वे भागे भागे आए। फि‍र उन्‍होंने ख़बर दी:एक शादीशुदा चोर ने एक शादीशुदा छात्रा से कि‍या प्रेम।   

   चोर ने चैनलवालों के एडि‍टरों को पत्र लि‍खकर गहरी आपत्‍ति‍ जतायी-        खबर में चोर शब्‍द का इस्‍तेमाल क्‍यों कि‍या गया ? क्‍या एक चोर एक मनुष्‍य की तरह प्रेम नहीं कर सकता ?क्‍या एक चोर के रूप में परि‍चय दि‍या जाना जरूरी ह ?यह मामला चोर और उस छात्रा तथा चोर की पत्‍नी और छात्रा के पति‍ के बीच का है। इसमें मीडि‍या कहां आ गया ?दरअसल प्रेम के माध्‍यम से दो स्‍त्रि‍यां मुक्‍त होना चाहती थीं।

पाद टि‍प्‍पणी: ख़बर का शीर्षक यह भी हो सकता था पर समाज में जब प्रेम का संकट गहरा है तो भाषा का भी संकट गहरा जाता है। 

     चोर और प्रधानमंत्री

चोर पहले अपने देश के प्रधानमंत्री को बहुत ईमानदार मानता था। वह सोचता था कि‍ वह भी चोरी का धंधा छोड़कर अपने प्रधानमंत्री की तरह ईमानदार बन जाएगा लेकि‍न उसके एक दोस्‍त ने कहा- ‘’तू ईमानदार नहीं बन सकता कभी भी, क्‍योंकि‍ तेरा वि‍श्‍व बैंक से कोई संबंध नहीं रहा है और तू जि‍न्‍दगी भर दि‍ल्‍ली में रहते हुए असम से राज्‍यसभा का सदस्‍य भी नहीं बन सकता।

 चोर और वामपंथी

चोर वामपंथि‍यों के पास गया। उसने पूछा, ‘’ आप सरकार को कब तक समर्थन देते रहेंगे। कभी न कभी उनका दामन छोड़ना पड़ेगा। आप लोग जन आंदोलन क्‍यों नहीं करते? सालोंसाल से जहां हैं, वहां से आगे नहीं बढ़ पाए?    वामपंथि‍यों का गुस्‍सा आया। उन्‍होंने कहा, ‘’ एक तो तू चार है। ऊपर से नसीहत देता है। चल फुट जा। सीधे झंडेवाला से आ रहा है क्‍या?

    चोर ने बुरा नहीं माना। वह जानता था वामपंथी हैं, आत्‍ममुग्‍ध होते हैं। पर हे प्रभु उन्‍हें माफ करना क्‍योंकि‍ उनकी नीयत खराब नहीं है। जि‍तनी बुद्धि‍ उनके पास है, वे उससे वर्षों से लड़ रहे हैं। 

     चोर और अमेरि‍का

कुछ चोर ऐसे भी थे। वे चोरी नहीं करते थे। वे सांप्रदायि‍कता के खि‍लाफ लड़ते हैं। वे सभी प्रेमचंद की परंपरा से अपने को जोड़ लेते हैं और आज अमरीका के खि‍लाफ लड़ते हैं, पर उनके बच्‍चे फ़रार्टदार अंग्रेजी बोलते हैं और अमरीका में ही पढ़ते हैं।   

    वे अपने बच्‍चों से मि‍लने तीन महीने अमरीका में ही रहते हैं। वहीं कि‍सी यूनि‍वर्सिटी में वि‍जि‍टि‍न्‍ग प्रोफसर भी हो जाते हैं। डॉलर कमाकर लाते हैं।

 वे अपने बच्‍चों की शादी फ़इव स्‍टार होटल में करते हैं, जहां सारे कॉमरेड जेएनयू में बि‍ताए गए दि‍नों की चर्चा करते हैं।

पाद टि‍प्‍पणी: क्‍या आप कभी ऐसे कि‍सी समाजवादी चोर के बेटे की शादी में गए हैं। मौका मि‍ले तो जरूर जाइये। आपको पता चल जाएगा कि‍ समाज में कि‍तने तरह के चोर होते हैं।

Read Full Post »