Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘कुछ यू ही खाली पीली’ Category

bheel-art.jpg

आज एक नए शब्‍द से परि‍चि‍त हुआ। वह शब्‍द है मौताणा। सुनने पर बड़ा अजीब लगा। मेरे एक वरि‍ष्‍ठ सहयोगी ने इस शब्‍द का मतलब समझाया।

दरअसल यह शब्‍द राजस्‍थान में उदयपुर के आसपास अधि‍क प्रचलि‍त है।    इस क्षेत्र में भील आदि‍ जनजाति‍यों में कि‍सी व्‍यक्‍ति‍ की मौत के पीछे अगर कि‍सी भी तरह कोई दूसरा व्‍यक्‍ति‍ अगर जि‍म्‍मेदार हो तो मृतक के रि‍श्‍तेदार उससे हर्जाना मांगते है जि‍से मौताणा कहते हैं।   

 मौताणा वसूलने के वे पुलि‍स या कचहरी का सहारा नहीं लेते। वे मृतक की लाश उसकी मौत के लि‍ये जि‍म्‍मेदार व्‍यक्‍ति‍ के घर के सामने रख देते हैं और उससे मौताणा मांगते हैं। वे यह भी कहते हैं कि‍ मौताणा दो वर्ना तुम्‍हारे घर में लाश का अंति‍म संस्‍कार करेंगे। और कि‍सी भी कीमत पर मौताणा वसूले बगैर लाश नहीं हटायी जाती। 

आज की खबर यह थी कि‍ एक भील व्‍यक्‍ति‍ एक सड़क पर टैक्‍टर से घायल हो गया और अस्‍पताल में उसकी मौत हो गयी। मृतक के रि‍श्‍तेदारों में टैक्‍टर मालि‍क के घर के सामने लाश रख दी और मौताणे की रकम 50000 रूपए वसूलने के बाद ही लाश हटायी गयी।   

मेरे सहयोगी बता रहे थे कि‍ एक बार कि‍सी भील को एक सांप ने काट लि‍या था। तो जि‍स व्‍यक्‍ति‍ के खेत से होकर वह सांप गया था मौताणे की रकम उससे वसूली गयी। एक बार तो हद ही हो गयी। एक व्‍यक्‍ति‍ की मौत हो गयी और कारण यह खोजा गया कि‍ बीस साल पहले फुटबाल खेलते हुए उस व्‍यक्‍ति‍ को चोट लग गयी था। माना गया कि‍ मौत उसी वजह से हुई होगी और लोग मौताणा वसूलने पहुच गए उस व्‍यक्‍ति‍ के घर।     

Advertisements

Read Full Post »